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कार खरीदना है सही फैसला या लीज पर लेना है पैसा वसूल, पढ़ें दोनों का फायदा नुकसान

नई दिल्ली: आजकल दुपहिया वाहन हो या कार, सभी कंपनियां लीज पर अपनी गाड़ियां दे रही है। लेकिन सवाल उठता है कि कार खरीदना या कार लीज पर लेना इनमें से कौन सा कदम कस्टमर्स के लिए फायदेमंद होता है। अगर आप भी मार्केट में नए चले इस ट्रेंड से कंफ्यूज हो रहे हैं तो पढ़ें ये खबर क्योंकि हम आज आपको बताएंगे इसके फायदे और नुकसान

  • लीज पर कारें 12 महीने से लेकर 48 महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। लीज पर कारें 12 महीने से लेकर 48 महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। यानि अगर आप ऐसे इंसान हैं जो बहुत जल्दी चीजों से बोर हो जाता है तो लीज की फैसिलिटी आपके लिए बेस्ट हैं। क्योंकि लीज खत्म होने के बाद आप दूसरा व्हीकल चुन सकते हैं।
  • वहीं कार अगर ईएमआई पर खरीदी गई हो तो कुछ ही महीनों बाद बेचना मुश्किल होता है।
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  • लीज पर ली जाने वाली कारों को आप मोडिफाई नहीं करा सकते हैं। जी हां लीज कॉन्ट्रैक्ट्स में स्टीरियो सिस्टम या अपनी मर्जी के स्पीकर्स तक नहीं लगवा पाएंगे। इसीलिए कार खरीदना ही बेहतर ऑप्शन है। क्योंकि खुद की कार को आप अपने टेस्ट के हिसाब से चेंज करा सकते हैं।
  • कार लीज पर लेने से पहले एक बात जरूर जान लें कि मंथली सबस्क्रिप्शन पर मिलने वाली कारों पर कमर्शियल नंबरप्लेट मिलती है। यानि अगर दिल्ली में रहते हैं लेकिन जॉब गुरूग्राम में करते हैं तो आपको हर दिन स्टेट टैक्स चुकाना पड़ेगा।इतना ही नहीं अगर आप ट्रैवेल करते हैं तो आपको हर बार अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ेगा।
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  • ट्रांसफरेबल जॉब वालों को ऐसे लोग जिनका बजट कम हो उनके लिए कार को लीज पर लेना बेस्ट ऑप्शन होता है। इसके अलावा लीज में कार मेंटीनेंस का भी झंझट नहीं होता, क्योंकि कई कार कंपनियां कार मैंटिनेंस का खर्च खुद वहन करती हैं।


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